Abhinavagupta Millennium Celebrations, 2016-2017

(आचार्य अभिनवगुप्त सहस्राब्दी समारोह, २०१६-२०१७.)

आचार्य अभिनवगुप्त का रचना संसार

स्रोत: Acharya Abhinav Gupt       तारीख: 26-Dec-2015


 

 

 

 

 

 

 

 

 

कई स्तोत्रों, जिन में भैरव स्तोत्र सब से प्रसिद्ध है के अतिरिक्त उन की तीन महत्त्वपूर्ण रचनाएं प्रत्यक्ष रूप से शैव दर्शन के बारे में नहीं है, यद्यपि उन पुस्तकों की रचना का उद्देश्य शैव दर्शन की दृष्टि से ही व्याख्या करना है। पहली रचना है भगवतगीता संग्रह। इसमें अभिनव गुप्त ने गीता को विद्या और अविद्या के बीच संघर्ष के रूप से देखा है और यह नतीजा निकाला है कि परम चैतन्य के साक्षात्कार पर ही मोह से मुक्ति मिल सकती है। अन्य दो रचनाएं सौंदर्यशास्त्र अैर नाट्यशास्त्र के बारे में हैं। पहली अभिनव भारती भरत मुणि की रचना पर अपनी टीका है तो दूसरी लोचना आनंद वर्धन के ध्वन्यालोक पर। इस वर्ग में अभिनव गुप्त ने एक और पुस्तक लिखी थी जो उन के गुरु भट्ट तोता की एक रचना पर आधारित थी। लेकिन यह पुस्तक काव्यकौतुक विवर्ण उप्लब्ध नहीं है। कुछ लेखकों ने कुछ और अनुपलब्ध पुस्ताको की सूची दी है जिन मे अनुभव निवेदनम, देहास्थ देवता चक्रम, परामार्थ द्वादशिका , प्रकिरणका विवर्ण आदि हैं।