Abhinavagupta Millennium Celebrations, 2016-2017

(आचार्य अभिनवगुप्त सहस्राब्दी समारोह, २०१६-२०१७.)

श्री श्री रवि शंकर आचार्य ने की आचार्य अभिनवगुप्त सहस्राब्दी वर्ष समारोह की शुरूआत

स्रोत: Acharya Abhinav Gupt       तारीख: 13-Feb-2016


श्री श्री रवि शंकर ने १३ फरवरी को विज्ञान भवन में आयोजित एक समारोह में आचार्य अभिनवगुप्त सहस्राब्दी वर्ष समारोह का शुभारंभ किया। राज्य मंत्री, पीएमओ, डॉ जितेंद्र सिंह और केंद्रीय गृह राज्यमंत्री, किरण रिजिजू, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और ब्रिटिश संसद सदस्य बॉब ब्लैकमैन ने भी समारोह में भाग लिया। हिंदू धर्म आचार्य सभा के संयोजक स्वामी परमात्मानन्द सरस्वती भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

जम्मू कश्मीर अध्ययन केंद्र के अध्यक्ष पद्मश्री श्री जवाहर लाल कौल की पुस्तक 'अभिनवगुप्त एंड द शैव रेनेसांस'(Abhinavagupta and the Shaiva Renaissance) का इस अवसर विमोचन किया गया।

जम्मू कश्मीर अध्ययन केंद्र और आर्ट ऑफ लिविंग, कई दूसरे का समर्थन संगठनों के सहयोग से, भारत भर में आचार्य अभिनवगुप्त के सहस्राब्दी वर्ष समारोह का आयोजन कर रहे हैं। इस प्रयोजन के लिए एक अखिल भारतीय सहस्राब्दी समारोह समिति का गठन किया गया है, जिसके अध्यक्ष आर्ट ऑफ लिविंग के श्री श्री रवि शंकर हैं।

काश्मीर के आचार्य अभिनवगुप्त विश्व के महानतम दार्शनिकों और साहित्यिक आलोचकों में से एक थे। दक्षिण एशिया के लिए उनका वही स्थान है जो प्लेटो या अरस्तू का पश्चिमी सभ्यता के लिए है। उनकी बहुमुखी प्रतिभा ऐसी थी कि उनके काम पर वर्तमान में दुनिया भर के (पचास से अधिक) देशों में शोध किया जा रहा हैं।

काश्मीर शैव दर्शन के प्रस्तावक के रूप में विख्यात आचार्य अभिनवगुप्त ने तंत्र और रंगमंच पर भी कई किताबें लिखी हैं। भरत मुनि के नाट्य शास्त्र पर उनकी टिप्पणी भारतीय काव्य, नाटक, नृत्य और संगीत जगत का एक अनिवार्य हिस्सा है।

इस अवसर पर बोलते हुए डॉ नवजीवन रस्तोगी, लखनऊ विश्वविद्यालय में संस्कृत और प्राकृत भाषा विभाग के भूतपूर्व विभागाध्यक्ष, ने कहा कि आचार्य अभिनवगुप्त खुद में एक विश्वकोश थे। उन्होंने कहा कि आचार्य अभिनवगुप्त ने प्राचीन पुस्तकों और वेदों की कम से कम 250 पांडुलिपियों का अध्ययन किया और उन्हें आम आदमी के लिए एक सरल प्रारूप में प्रस्तुत किया। डॉ रस्तोगी ने बताया कि उनकी 'तंत्रालोक' तंत्र पर एक पूरा विश्वकोश है। डॉ रस्तोगी खुद ने आचार्य अभिनवगुप्त पर कई किताबें लिखी हैं।

हिंदू आचार्य सभा के संयोजक स्वामी परमानन्द ने कहा कि भारतीय समाज हमेशा से ज्ञान साधक रहा है। ज्ञान और शिक्षा का प्राचीन काल से भारत में बड़ा सम्मान रहा है। दुर्भाग्य से, हमारे पूर्वजों ने हमारे लिए जो छोड़ा उसमे से हमने बहुत कुछ खो दिया है। अपने पूर्वजों के प्राचीन ज्ञान को हमें पुनर्जीवित करने के प्रयास करने होंगें। केवल तभी हम भारत माता को फिर से दुनिया के शीर्ष पर ला सकतें हैं, स्वामी परमात्मानन्द जी ने कहा।

केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि दुनिया भारत की ओर आशाभरी नजरों से देख रही है। "मैंने दुनिया भर के कई प्रभावशाली/धनी लोगों को सच्चे सुख की तलाश में भारत आते देखा है," उन्होंने कहा। "हमने दुनिया को महान संदेश दिया है, लेकिन अब अपने महान गुरुओं द्वारा दिखाए पथ को हम भूल गए हैं। यही आज हमारी समस्याओं का कारण है", किरण रिजिजू ने कहा।

केंद्रीय मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि आचार्य अभिनवगुप्त स्मृति में सहस्राब्दी वर्ष मना करके हम खुद को अनुग्रहित कर  हैं। कश्मीर के संदर्भ में, डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि हाल ही में कश्मीर एक लंबे दुःस्वप्न से बाहर आया है। कश्मीरी पंडितों की घाटी से बाहर धकेलने के बाद जो जो लोग वहां रह गए हैं उन्हें जल्दी ही खुद को हुए नुकसान का अहसास भी जल्दी होगा।

ब्रिटिश संसद के सदस्य बॉब ब्लैकविल ने समारोह में एक भावपूर्ण भाषण दिया। इस अवसर पर बोलते हुए उन्होंने कहा, "भारत आनंदमय जगह है और मैं आज यहां आकर बहुत खुश हूँ"। उन्होंने यूनाइटेड किंगडम में असीम योगदान के लिए भारतीय मूल के लोगों को धन्यवाद देते हुए इस अवसर पर संयुक्त राष्ट्र में भारत के लिए स्थायी सीट के लिए अपने समर्थन की घोषणा की।

श्री श्री रविशंकर ने विज्ञान भवन में लगभग 2000 की सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय सोच हमेशा से सभी दिशाओं से ज्ञान लेने की रही है। प्राचीन काल से ही भगवान शिव भारत को जोड़ने वाली एक शक्ति रहें हैं। सैकड़ों साल पहले ही कश्मीरी लोग दक्षिण भारत में आ गए थे। कर्नाटक में कूर्ग के लोग कश्मीरी मूल के हैं, उन्होंने बताया।

"हमें कश्मीर से केरल तक शिव मंदिर मिल जायेंगे। अगर कुछ कन्याकुमारी से कश्मीर तक के भारत के लोगों को जोड़ता है तो वह है शैव सिद्धांत (भगवान शिव द्वारा दिखाया गया पथ) है, "उन्होंने कहा। "यह दुख की बात है कि जिस आचार्य अभिनवगुप्त ने यह संभव बनाया उसका आज स्कूल की किताबों में कोई जिक्र नहीं है", यह कहते हुए श्री श्री ने वस्तुतः मांग की कि स्कूल के पाठ्यक्रम आचार्य अभिनवगुप्त के अध्ययन को शामिल करना चाहिए।

"अनुभव करने के बाद विश्वास करने का ही प्राच्य सिद्धांत था। यही कारण है कि विज्ञान और प्राचीन अध्यात्म में कभी संघर्ष नहीं था",श्री श्री रविशंकर ने कहा। 'प्रत्यभिज्ञा दर्शन' अभिनवगुप्त द्वारा लिखित है। 'प्रत्यभिज्ञा' की अद्भुत अवधारणा की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि यह शब्द 'प्राप्त' करने के लिए बल्कि 'पहचान' से जुड़ा है।

उन्होंने सुझाव दिया कि, सहस्राब्दी समारोह के दौरान, एक फिल्म आचार्य अभिनवगुप्त पर बनाई जानी चाहिए ताकि आम लोगो तक उनकी शिक्षा को पहुँचाया जा सके। श्री श्री रविशंकर ने अपील करते हुए कहा कि अभिनवगुप्त सहस्राब्दी वर्ष पर जिस एक सन्देश को विश्व में पहुँचाना चाहिए वह है "हिंसा का मुकाबला केवल हिंसा से नही बल्कि बुद्धिमत्ता से किया जा सकता है"।