Abhinavagupta Millennium Celebrations, 2016-2017

(आचार्य अभिनवगुप्त सहस्राब्दी समारोह, २०१६-२०१७.)

अभिनव संदेश यात्रा (31 मार्च-10 जून)

स्रोत: Acharya Abhinav Gupt       तारीख: 08 Apr 2016 16:05:30

आचार्य अभिनवगुप्त सहस्त्राब्दी समारोह समिति द्वारा आयोजित अभिनव संदेश यात्रा का विधिवत शुभारंभ 31 मार्च को गोवा और तमिलनाडु से हुआ।

संदेश यात्रा को दो हिस्सों में बांटा गया है संदेश यात्रा का समापन 10 जून को जम्मू-कश्मीर में होगा।

इस दौरान जहां जहां कश्मीरी समाज के लोग रहते हैं उनसे मिलकर वहां की मिट्टी और पवित्र नदी के जल को एक कलश में एकत्रित किया जाएगा। जिसे यात्रा समाप्ति के बाद कश्मीर स्थित भैरव गुफा तक ले जाया जाएगा। भैरव गुफा वह पवित्र स्थान है जहां आज से हजारों साल पहले कश्मीरी शैव दर्शन के प्रकांड विद्वान आचार्य अभिनवगुप्त अपने शिष्यों के साथ शिव में विलीन हो गए। आपको बता दें कि आचार्य अभिनवगुप्त कश्मीरी शैव दर्शन के प्रखर विद्वान और महान दार्शनिक थे। आगम व प्रत्यभिज्ञा दर्शन के प्रतिनिधि आचार्य होने के साथ ही वे साहित्य जगत में एक महत्वपूर्ण स्थान रखते थे। परमार्थसार, प्रत्यत्भिज्ञा विमर्शनी, गीतार्थ संग्रह जैसे ग्रथों की रचना करने के साथ ही उन्होंने भारतमुनि के नाट्यशास्त्र और आनंदवर्धन के ध्वन्यालोक पर टीका भी की जो आज कालजयी कृतियों में गिनी जाती है। अभिनवगुप्त को मंत्र सिद्ध साधक और भैरव का अवतार माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि पृथ्वी पर अपनी भूमिका निर्वाह कर वे अपने शिष्यों के साथ शिव स्तुति करते हुए कश्मीर के बड़गाम के बीरवा नामक ग्राम में स्थित एक गुफा में शिवलीन  गए।

आज इस घटना के एक हजार साल पूरे होने की स्मृति में अभिनवगुप्त सहस्त्राब्दी समारोह मनाया जा रहा है और देश भर में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।  अभिनव संदेश यात्रा भी इसी कड़ी का एक प्रमुख हिस्सा है जिसके जरिए कश्मीर को शेष भारत से और शेष भारत के लोगों को कश्मीर से जोड़ा जा सकेगा।

यात्रा में सम्मिलित जम्मू-कश्मीर अध्ययन केंद्र के अवनीश राजपूत ने बताया कि यह हमारा सौभाग्य है कि आचार्य अभिनवगुप्त के महाप्रयाण के सहस्त्राब्दी समारोह के आयोजन का अवसर हमें प्राप्त हुआ है। भारतीय ज्ञान परंपरा के इस पुरोधा का जीवन हम सब के लिए प्रेरणादायी है। दार्शिनक स्तर पर समन्वय के जो सूत्र आचार्य अभिनवगुप्त छोड़े हैं, उसके सिरे पकड़कर आज उपस्थित दार्शनिक, लौकिक और आध्यात्मिक समस्याओं के समाधान की ओर बढ़ा जा सकता है।